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Aeps ID कैसे बंद करे, How to close Aeps ID , आवेदन कैसे करे

Aeps मतलब आधार इनेबल पेमेंट सिस्टम जो वर्तमान समय की बहुत उपयोगी सर्विस है , जो बैंक खाता धारक को बैंक ब्रांच के अलावा किसी ऑनलाइन शॉप (aeps संचालक/ ग्राहक सेवा केंद्र) से नगद निकासी की सुविधा प्रदान करता है , वर्तमान समय बहुत सारी कंपनी बाजार में है जो aeps की सर्विस प्रदान कर रही है और इनकी ID लगभग निशुल्क और आसानी से उपलब्ध हो जाती है ,

RBI की गाइड लाइन के अनुसार एक व्यक्ति एक समय में एक की बैंक की ID चला सकता है और एक स्थान (एक दुकान या ऑफिस) पर एक से ज्यादा व्यक्ति अलग अलग बैंक का सर्विस नहीं दे सकते

अगर आप किसी बैंक का अधिकृत बैंक कीओस्क संचालित करते है तो नियमानुसार आप प्राइवेट कंपनी की aeps पोर्टल ID नहीं चला सकते ,
अगर आप ऐसा करते है तो बैंक आपका अधिकृत बैंक कीओस्क बंद कर देगा और आप सामान्यता इसको पुनः शुरू नहीं करा सकते ,

यदि आप नहीं चाहते की आपका अधिकृत बैंक कीओस्क बंद हो तो आपको प्राइवेट कंपनी की aeps पोर्टल ID बंद करने की आवस्यकता है
इसके लिए आपको अपनी रेजिस्टर्ड मेल से सम्बंधित कंपनी (कस्टमर केयर) को मेल करने प्राइवेट कंपनी की aeps पोर्टल ID बंद करने का अनुरोध करना होगा , मेल करते समय आप अपने अधिकृत बैंक कीओस्क प्रदाता कंपनी , और लिंक ब्रांच को भी CC में रखे

आपको आवेदन कैसे करना है इसका एक उदारहरण हम इस लेख में दे रहे है आप अपनी जानकारी के अनुसार इसे सुधार कर आवेदन कर सकते है

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हिंदी में आवेदन कैसे करे

 

प्रति
कंपनी का नाम
कंपनी का एड्रेस

विषय : रिटेलर ID (यंहा अपना प्राइवेट कंपनी की aeps ID लिखे) को निष्क्रिय करने वाबद

महोदय निवेदन है कि मै (आपका नाम) आपकी कंपनी से जुड़ा हुआ (यंहा अपना प्राइवेट कंपनी की aeps ID लिखे) ID चलता हूँ , चुकी मेरे नाम पर (यंहा उस बैंक का नाम लिखे जिसका कीओस्क आपके पास है) बैंक का कीओस्क है और नियमानुसार मै प्राइवेट कंपनी की aeps पोर्टल ID नहीं चला सकता हूँ जिसका पूर्व में मेरे को जानकारी नहीं था , अतः आपसे निवेदन है की मेरा (यंहा अपना प्राइवेट कंपनी की aeps ID लिखे) बंद / निष्किय किया जावे , ताकि मै केवल (यंहा उस बैंक का नाम लिखे जिसका कीओस्क आपके पास है) बैंक कीओस्क का संचालन कर सकू और बैंक के नियम का पालन कर सकू , आप जल्द से जल्द मेरा ID बंद करने का कष्ट करे
धन्यवाद

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Application in English

To

[Name of the company]

[company address]

 

Subject: Regarding deactivation of Retailer ID (here write your private company’s aeps ID)

 

Sir, it is a request that I (your name) associated with your company (here write your aeps ID of private company) . Already in my name (here write the name of the bank whose kiosk is with you) bank’s kiosk and According to the rules, I cannot run the aeps portal ID of a private company.

Which was not known to me earlier, so you are requested to close/deactivate my (here enter your private company’s aeps ID), so that I can use only (here write the name of the bank whose kiosk is with you) bank kiosk I can operate and follow the rules of the bank, please try to close my ID as soon as possible

Thank you

 


इस मेल को अपनी प्राइवेट कंपनी के कस्टमर केयर ईमेल में सेंड करे और ईमेल के CC में अपने बैंक कीओस्क प्रदाता कंपनी और बैंक की लिंक ब्रांच को ईमेल करे

Bank के नए नियम: ‘चेक बाउंस’ होने पर दूसरे खाते से काटे जाएंगे पैसे!

चेक बाउंस के मामलों (Cheque Bounce Case) पर केंद्र सरकार सख्ती से निपटने की योजना बना रही है. आपको बता दे कि वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) चेक जारी करने वाले के अन्य खातों से पैसा काटने और ऐसे मामलों में नए खाते खोलने पर रोक लगाने जैसे कई कड़े नियमो को लाने पर विचार कर रही है.

Finance Ministry ने चेक बाउंस के बढ़ते मामलों को देखते हुए एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई थी. इस तरह के कई सुझाव प्राप्त हुए हैं. ऐसे मामलों से कानूनी प्रणाली पर भार बढ़ता जा रहा है. इसमें कुछ ऐसे सुझाव हैं जिनमें कुछ कदम कानूनी प्रक्रिया से पहले उठाने पर चर्चा की गई है. साथ ही चेक जारी करने वाले के खाते में पर्याप्त पैसा नहीं है तो उसके अन्य खातों से राशि काट लेना का नियम आ सकता है.

कानूनी राय पर विचार

सूत्रों के अनुसार अन्य सुझावों में चेक बाउंस के मामले को कर्ज चूक की तरह लेना और इसकी जानकारी लोन सूचना कंपनियों को देना शामिल है, जिससे कि व्यक्ति के अंक कम किए जा सके. इन सुझावों को स्वीकार करने से पहले कानूनी राय ली जाएगी.

ये सुझाव अमल में आते हैं, तो भुगतानकर्ता को चेक का भुगतान करने पर मजबूर होना पड़ेगा और मामले को अदालत तक ले जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इससे कारोबारी सुगमता बढ़ेगी तथा खाते में पर्याप्त पैसा नहीं होने के बावजूद जानते-बूझते चेक जारी करने के चलन पर भी रोक लगेगी. चेक जारी करने वाले के अन्य खाते से राशि स्वत: काटने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया और अन्य सुझावों को देखना होगा. चेक बाउंस होने का मामला अदालत में दायर किया जा सकता है और यह एक दंडनीय अपराध है जिसमें चेक की राशि से दोगुना जुर्माना या दो वर्ष तक का कारावास या दोनों सजा हो सकती है.

पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के उद्योग संगठन (पीएचडीसीसीआई) ने हाल में वित्त मंत्रालय से अनुरोध किया था कि चेक बाउंस के मामले में बैंक से पैसा निकलने पर कुछ दिन तक अनिवार्य रोक जैसे कदम उठाए जाएं जिससे कि चेक जारी करने वालों को जवाबदेह बनाया जा सके. PHDCCI का कहना है कि केंद्र सरकार को ऐसा कानून लाना चाहिए, जिसके तहत चेक का भुगतान नहीं होने की तारीख से 90 दिन के अंदर दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता के जरिये मामले को सुलझाया जाएगा.

केन्द्रीय वित्तीय सेवा विभाग के सचिव संजय मल्होत्रा ​​को पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) ने एक पत्र लिखा है. इस पत्र में उद्योग ने चेक बाउंस होने का मुद्दे को गंभीरता के साथ उठाया है. पीएचडीसीसीआई (PHDCCI) के महासचिव सौरभ सान्याल का कहना है कि भारत सरकार अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए कारोबार सुगमता पर ध्यान केंद्रित कर रही है, इसलिए चेक के बाउंस होने से संबंधित मुद्दों पर विचार करना बहुत महत्वपूर्ण है. यह खरीदार और विक्रेता के बीच अविश्वास पैदा करता है.